भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता हुआ है, जिसे आर्थिक रिश्तों के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। इस मेगा ट्रेड डील का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि इसके तहत आयात शुल्क (Import Duty) में बड़ी कटौती की गई है। खासतौर पर लग्ज़री कारों, प्रीमियम शराब और यूरोपीय उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी।
1. लग्ज़री कारों के शौकीनों के लिए बड़ी राहत
अब भारतीय सड़कों पर जर्मनी और इटली की लग्ज़री कारें पहले से कहीं ज़्यादा नजर आएंगी। इस समझौते के तहत यूरोपीय देशों से आने वाली पूरी तरह से निर्मित कारों (CBU) पर लगने वाला भारी टैक्स लगभग खत्म कर दिया गया है।
- टैरिफ में बदलाव: आयात शुल्क 110% से घटाकर लगभग 10% कर दिया गया है।
- कीमतों पर असर: जो कार पहले 1 करोड़ रुपये की पड़ती थी, अब उसकी कीमत में 40 से 50 लाख रुपये तक की कमी आ सकती है।
- प्रमुख ब्रांड: मर्सिडीज-बेंज, BMW, ऑडी, पोर्श और वोल्वो जैसी कंपनियों को इस फैसले से सीधा फायदा मिलेगा।
2. प्रीमियम शराब और वाइन होंगी सस्ती
भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक है, लेकिन अब तक ऊंचे टैक्स के कारण यूरोपीय शराब और वाइन बेहद महंगी थी। नई डील के बाद इस सेगमेंट में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।
अब फ्रांस, इटली और स्पेन से आने वाली वाइन और प्रीमियम शराब पहले के मुकाबले कहीं सस्ती कीमतों पर उपलब्ध होंगी, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और उपभोक्ताओं—तीनों को फायदा होगा।
3. ये यूरोपीय उत्पाद भी होंगे सस्ते
इस समझौते के तहत 90% से अधिक यूरोपीय उत्पादों पर व्यापार बाधाएं हटा दी गई हैं।
- डेयरी और चॉकलेट: स्विट्ज़रलैंड और बेल्जियम की चॉकलेट, नीदरलैंड का चीज़ और डेनमार्क का मक्खन अब कम कीमत में मिलेगा।
- ऑलिव ऑयल: स्पेन और इटली से आने वाला जैतून का तेल अब आम रसोई तक आसानी से पहुंच सकेगा।
- हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स: यूरोप में बनी मशीनरी और हाई-टेक गैजेट्स की कीमतों में 15% से 25% तक की गिरावट आ सकती है।
4. भारत के लिए ‘विन-विन’ समझौता
यह डील सिर्फ आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के लिए भी बड़े फायदे लेकर आई है।
- टेक्सटाइल और लेदर: भारतीय कपड़े और चमड़े के उत्पादों को यूरोप के 27 देशों में शून्य ड्यूटी पर प्रवेश मिलेगा, जिससे निर्यात में करीब 30% की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
- प्रोफेशनल्स के लिए वीज़ा आसान: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और डॉक्टरों के लिए यूरोपीय देशों में काम करने के नियम सरल किए गए हैं।
- कृषि निर्यात को बढ़ावा: चावल, चाय और समुद्री उत्पादों (सी-फूड) के निर्यात के लिए मानकों में ढील दी गई है।
निष्कर्ष
भारत-EU मेगा ट्रेड डील न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि भारतीय उद्योग, निर्यात और प्रोफेशनल्स के लिए भी नए अवसर खोलेगी। सस्ती लग्ज़री कारें, किफायती प्रीमियम उत्पाद और बढ़ता निर्यात—यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
