मैं उदयपुर हूं—झीलों, महलों और इतिहास की सांसों से जीवित एक शहर। आज मैं अपना 474वां स्थापना दिवस मना रहा हूं, और यह संयोग ही है कि यह पावन दिन अक्षय तृतीया के साथ आया है। अरावली की गोद में बसा मैं केवल स्थापत्य का चमत्कार नहीं, बल्कि सदियों की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और मानवीय सोच का प्रतीक हूं। मुझे कई नामों से पुकारा गया—‘झीलों का शहर’, ‘रोमांटिक सिटी’ और ‘पूर्व का वेनिस’। ये सिर्फ उपनाम नहीं, बल्कि मेरी आत्मा की पहचान हैं। मेरे आंगन में बसे पिछोला, फतेहसागर और उदयसागर जैसे जलाशय केवल सुंदरता नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा के आधार रहे हैं। पिछोला झील की कहानी तो एक साधारण बंजारे ‘पिच्छू’ से शुरू होती है, जिसने अपने मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए एक छोटा तालाब बनवाया। वही आज विश्व की सबसे खूबसूरत झीलों में गिनी जाती है—यह मेरे भीतर छिपी साधारण से असाधारण बनने की ताकत का प्रमाण है। मेरे इतिहास में गौरव के कई अध्याय दर्ज हैं। जेम्स टॉड ने मुझे भारत का सबसे ‘रोमांटिक’ स्थान कहा था। उनकी पुस्तक Annals and Antiquities of Rajasthan में दर्ज यह प्रशंसा मेरे लिए वैश्विक पहचान बनी। यही वजह है कि Travel + Leisure के 2024 रीडर्स चॉइस अवॉर्ड में मुझे दुनिया का दूसरा सबसे खूबसूरत शहर चुना गया। एशिया में मैं पहले स्थान पर रहा—यह मेरे वैभव और विरासत की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति है। मेरे शासकों की दूरदर्शिता भी कम अद्भुत नहीं थी। महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने मुझे बसाया और झीलों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो सिर्फ जल संग्रहण नहीं बल्कि सुरक्षा कवच भी था। पहाड़ियों के बीच बने बांध दुश्मनों के लिए बाधा बनते थे—यह प्राचीन ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। मेरी मिट्टी रिश्तों की मिसाल भी रही है। 1622 में जब शहजादा खुर्रम (शाहजहां) ने विद्रोह किया, तब महाराणा करण सिंह ने उसे जगमंदिर में शरण दी। दोनों ने पगड़ी बदलकर भाईचारे का संदेश दिया—यह घटना आज भी त्याग और सम्मान की मिसाल है। पर मैं केवल इतिहास नहीं, वर्तमान में भी जीवंत हूं। वर्ष 2025 में 21 लाख से अधिक पर्यटक मेरे पास आए—यह दर्शाता है कि मैं आज भी लोगों के दिलों में बसता हूं। 2018 से 2025 तक मेरे यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह मेरी बढ़ती लोकप्रियता और आकर्षण का प्रमाण है। मैं सिर्फ इमारतों और झीलों का शहर नहीं हूं—मैं कहानियों का शहर हूं, भावनाओं का शहर हूं। मेरी हर गली, हर घाट और हर महल एक कहानी कहता है। मैं उदयपुर हूं—अतीत की विरासत, वर्तमान की पहचान और भविष्य की उम्मीद।



















