उदयपुर में मुखर्जी चौक पर नगर निगम की कार्रवाई का विरोध सुबह उस समय तेज हो गया, जब नगर निगम की टीम पुलिस जाब्ते के साथ सब्जी मार्केट के बाहर बैठी महिला फल-सब्जी विक्रेताओं को हटाने पहुंची। पार्किंग स्थल विकसित करने की योजना के तहत इन अस्थायी विक्रेताओं को मंडी परिसर के अंदर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन वर्षों से यहां व्यापार कर रही महिलाओं ने अपनी जगह छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। स्थिति को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पार्किंग योजना के चलते शुरू हुई कार्रवाई
नगर निगम की ओर से मुखर्जी चौक क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और पार्किंग सुविधा विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसी के तहत सब्जी मार्केट के बाहर सड़क किनारे बैठने वाली महिला फल एवं सब्जी विक्रेताओं को हटाकर मंडी के अंदर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।सुबह निगम कर्मचारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई शुरू की। इस दौरान सड़क किनारे रखे पत्थरों तथा अन्य अस्थायी सामान को ट्रैक्टर में भरकर हटाया गया। जैसे ही हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, वहां मौजूद महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया और अपनी निर्धारित जगह से हटने से इनकार कर दिया।
महिला विक्रेताओं का कहना, वर्षों से यहीं चल रहा है रोजगार
विरोध कर रही महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से इसी स्थान पर फल और सब्जियां बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती आ रही हैं। उनका मानना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया गया तो उनकी आय और रोज़गार पर सीधा असर पड़ेगा।जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई से 35 से अधिक महिला विक्रेता प्रभावित हो रही हैं। इनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से जुड़ी महिलाएं हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह रोज़ाना होने वाली बिक्री पर निर्भर है।
मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता, कार्रवाई पर उठाए सवाल
नगर निगम की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ और पूर्व पार्षद नजमा मेवाफरोश भी मौके पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए नगर निगम के फैसले पर सवाल उठाए।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्षों से यहां व्यापार कर रहे छोटे विक्रेताओं को बिना समुचित पुनर्वास के हटाना उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावित महिलाओं के हितों की अनदेखी की जा रही है। साथ ही यह मांग भी रखी गई कि यदि स्थानांतरण किया जाना है तो पहले सभी प्रभावित विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।कुछ नेताओं ने कार्रवाई के चयन और उसके तरीके पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्षता की मांग की।
नगर निगम ने बताया क्यों जरूरी है स्थानांतरण
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि मुखर्जी चौक शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। मुख्य सड़क पर लगने वाला अस्थायी बाजार लंबे समय से यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ था।नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार, प्रशासन कई वर्षों से इस क्षेत्र में अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रहा है। इसी योजना के तहत विक्रेताओं को मंडी परिसर के भीतर स्थानांतरित किया जा रहा है ताकि सड़क पर यातायात सुचारु रहे और आम लोगों को सुविधा मिल सके।
पुलिस की मौजूदगी में चला समझाइश का दौर
विरोध को देखते हुए मौके पर डीएसपी के नेतृत्व में सूरजपोल और धानमंडी थाना पुलिस पहले से मौजूद रही। बाद में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को भी बुलाया गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।नगर निगम के अधिकारियों ने महिला विक्रेताओं से बातचीत कर उन्हें नई व्यवस्था के बारे में समझाने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक महिलाएं अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं थीं। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना रहा।
शहरवासियों की नजरें समाधान पर
मुखर्जी चौक उदयपुर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में एक ओर जहां यातायात व्यवस्था सुधारने की जरूरत महसूस की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से यहां व्यापार कर रहे छोटे विक्रेताओं के पुनर्वास और आजीविका का मुद्दा भी चर्चा का विषय बना हुआ है।स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन और प्रभावित विक्रेताओं के बीच संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो और छोटे व्यापारियों के रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
निष्कर्ष
मुखर्जी चौक पर नगर निगम की कार्रवाई ने शहर में पार्किंग और यातायात प्रबंधन के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के पुनर्वास का मुद्दा भी सामने ला दिया है। एक तरफ नगर निगम सार्वजनिक सुविधा और सड़क व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला फल-सब्जी विक्रेता अपने वर्षों पुराने रोजगार को बचाने की मांग पर अड़ी हुई हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन और प्रभावित पक्षों के बीच होने वाली आगामी बातचीत और संभावित समाधान पर टिकी हैं।