उदयपुर में लावारिस हालत में बैठी 90 वर्षीय वृद्धा का रेस्क्यू

पुलिस का फर्ज केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद कर मानवता की सेवा करना भी है। उदयपुर में कालिका पेट्रोलिंग टीम की महिला कांस्टेबल कल्पना कुमारी और सुमित्रा के साथ हिरणमगरी थाने के एएसआई मोहन पाल सिंह ने संवेदनशीलता दिखाते हुए लावारिस हालत में बैठी 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
मामला शहर के रेती स्टैंड स्थित आवरी माता मंदिर के बाहर का है। यहां 90 वर्षीय रतन कुंवर मंगलवार दोपहर से बैठी हुई थीं। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण वह वहां से जा नहीं पा रही थीं।
कालिका टीम की कांस्टेबल कल्पना कुमारी ने बताया कि पाली जिले के बाली निवासी रतन कुंवर मंगलवार को बस से उदयपुर पहुंचीं। दोपहर करीब 3 बजे वह उदियापोल उतरीं और ऑटो से रेती स्टैंड स्थित आवरी माता मंदिर के बाहर पहुंचीं। चलने में परेशानी होने के कारण वह मंदिर के बाहर ही बैठ गईं।
रात 8 बजे गश्त के दौरान बुजुर्ग पर पड़ी पुलिस की नजर
रात करीब 8 बजे कालिका पेट्रोलिंग टीम की महिला कांस्टेबल कल्पना कुमारी और सुमित्रा गश्त करते हुए मौके पर पहुंचीं। इसी दौरान एक युवक ने उन्हें बताया कि बुजुर्ग महिला दोपहर से यहां बैठी हुई हैं। सूचना मिलने पर हिरणमगरी थाने के एएसआई मोहन पाल सिंह भी मौके पर पहुंचे।
पुलिसकर्मियों ने बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनके परिजनों और घर के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन वह स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दे पा रही थीं। कभी भाई के यहां कुराबड़ तो कभी बड़गांव जाने की बात कहने के कारण उनके परिजनों का पता लगाने में परेशानी हुई।
सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचाया, परिजनों की तलाश जारी
बुजुर्ग महिला की स्थिति को देखते हुए महिला कांस्टेबल कल्पना कुमारी, सुमित्रा और एएसआई मोहन पाल सिंह ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए उनका रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें भुवाणा स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचाया गया, ताकि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल पुलिस बुजुर्ग महिला के परिजनों की तलाश में जुटी है, जिससे उन्हें उनके परिवार से मिलाया जा सके।
90 साल की उम्र में असहाय अवस्था में बैठी बुजुर्ग महिला के लिए पुलिस मददगार बनी। महिला कांस्टेबल कल्पना, सुमित्रा और एएसआई मोहन पाल सिंह की इस पहल ने दिखाया कि पुलिस की वर्दी केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सहारा बनने का प्रतीक भी है।

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