उदयपुर स्थित जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुए के हमलों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 2011 से 2024 के बीच हुए एक अध्ययन में कुल 572 मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें करीब 98% मामले पशुधन के शिकार से जुड़े थे। इसके बावजूद प्रभावित ग्रामीणों को मिलने वाला मुआवजा वास्तविक नुकसान से काफी कम पाया गया। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के डॉ. विजय कुमार कोली और उनकी टीम द्वारा किए गए शोध में सामने आया कि केवल 31% लोगों ने ही मुआवजे के लिए आवेदन किया। जागरूकता की कमी और जटिल प्रक्रिया इसके प्रमुख कारण रहे। अध्ययन के अनुसार तेंदुए के हमले ज्यादातर रात में होते हैं, जब पशु खुले या कच्चे बाड़ों में बंधे होते हैं। बकरियां, गाय और बछड़े सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं। ऊंचाई वाले और अभयारण्य के पास बसे गांव अधिक प्रभावित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आर्थिक नुकसान के बावजूद ग्रामीणों में तेंदुए के प्रति आक्रोश नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार सांस्कृतिक मान्यताएं और सह-अस्तित्व की भावना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।




